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नींद आती है : बींच में टूट जाती है

2 weeks ago By Yogi Anoop

नींद तुरंत आ तो जाती है, पर दो-तीन घंटे बाद टूट क्यों जाती है? 

बहुत से लोगों की यह शिकायत होती है कि जैसे ही वे लेटते हैं, नींद तुरंत आ जाती है, लेकिन कुछ घंटों बाद अचानक नींद खुल जाती है। मेरे अनुसार कई प्रमुख कारणों में से मुख्यतः दो कारण होते हैं।

पहला कारण: खर्राटे और थकान 

दिनभर की थकान के कारण शरीर, मन और इंद्रियाँ—सभी थके हुए होते हैं। इसी वजह से लेटते ही, बल्कि कई बार बैठे-बैठे भी, नींद तुरंत आ जाती है। किंतु यह तुरंत आई हुई नींद वास्तविकता में गहरी नींद नहीं होती है । इस प्रकार की त्वरित नींद  यह संकेत दे रही होती है कि उसका मस्तिष्क दिन में बहुत अधिक थक चुका है । इस थकान का मूल करण उसके स्वाश-प्रस्वाश में अंतर्विरोध । उसमें अंतर्विरोध से मस्तिष्क में ऑक्सीजन की कमी हो जाती है । मस्तिष्क की इस अत्यधिक थकान के करण जैसे ही इस देह को किसी स्थान पर थोड़े समय के लिए बैठते हैं वैसे ही यह देह निद्रा की अवस्था में तुरंत ही जाने लगता है । बहुत सारे लोगों को आपने स्वयं देखा होगा कि लोग बैठे बैठे तुरंत सो जाते हैं  । 

इसका प्रमुख करण है कि देह नींद के द्वारा शरीर को रिकवरी में ले जाने का तीव्र रूप से प्रयास करने लगता है किंतु समस्या यह है कि साँसों के लय में बाधा होने के कारण उसकी नींद अधिक समय तक टिके नहीं रह पाती है । कुछ ही घंटों में व मिनटों में उसकी नींद पुनः टूट जाती है । वह कुछ पलों के लिए पुनः जग जाता है और थोड़ी देर एम पूना नींद में चला जाता है । ऐसी ही अवस्था बार बार घटित होती रहती है । कभी कभी किसी किसी को नींद टूट जाने पर कुछ घंटों तक नींद भी नहीं आती है । जब गले या श्वास-नली के क्षेत्र में खर्राटे की समस्या बढ़ जाती है, तो गहन निद्रा में प्रवेश नहीं कर पाता। नतीजा यह होता है कि कुछ ही मिनटों बाद व्यक्ति हल्की जागृति की अवस्था में आ जाता है, भले ही उसे इसका एहसास न हो। यही प्रक्रिया बार-बार दोहराई जाती है, और कुछ घंटों बाद व्यक्ति की नींद पूरी तरह खुल जाती है।

दूसरा कारण: एब्डोमिनल डिसकंफर्ट (पेट की बेचैनी)

दूसरा प्रमुख कारण है पेट के भीतर रहने वाला तनाव और दबाव जो रात में बढ़ जाता अहि जिससे देह के अंदर अतिरिक्त बेचैनी जैसे गैस या गैस्ट्रिक समस्या हो जाति है । जब पेट में जरूरत से ज्यादा गैस बनती है, तो यह ठीक वैसा ही होता है जैसे किसी गुब्बारे में ज्यादा हवा भरने पर उसकी दीवार पर खिंचाव आता है। इसी तरह पेट और छाती के हिस्से में खिंचाव पैदा होता है। समस्या सिर्फ़ पेट के खिंचाव तक सीमित रहे तब तक तो ठीक है किंतु पेट के खिंचाव की प्रतिक्रिया डायडफ़्राम , छाती और सिर इत्यादि में होने लगता है । यह खिंचाव इतना अधिक होता है कि कि उससे मन भी अछूता नहीं रह पाता और नींद तुरंत खुल जाती है ।  

जब यह खिंचाव होता है, तो मन पूरी तरह शांत और स्थिर रह ही नहीं रह सकता है । जब कि मन सोते समय शरीर से पूरी तरह अलग और निष्क्रिय अवस्था में होना चाहिए । यह खिंचाव उसे वापस शरीर की ओर खींच लाता है और उसे सक्रिय कर देता है। इसीलिए नींद के शुरुआती दो-तीन घंटे तो शरीर किसी तरह हीलिंग के लिए खींचकर सो लेता है, लेकिन उसके बाद जैसे ही मन जागृत होता है और शरीर की इस बेचैनी को महसूस करता है, नींद टूट जाती है। इसके बाद जब तक यह डिसकंफर्ट कम नहीं होता या शरीर में दोबारा थकान पैदा नहीं होती, तब तक नींद वापस नहीं आती। यही कारण है कि बीच रात में जागने के बाद घंटों नींद नहीं आती, और फिर सुबह के करीब कुछ देर के लिए नींद आती है।

समाधान: उदर प्राणायाम

इन दोनों कारणों—गले की खर्राटे वाली समस्या और पेट की गैस्ट्रिक बेचैनी—को एक साथ ठीक करने का सबसे प्रभावी तरीका है उदर प्राणायाम जिस पर मैंने कई वर्षों तक प्रयोग किया और उसका परिणाम बहुत सफल रहा । 

आमतौर पर ज्यादातर शिक्षक सलाह देते हैं कि प्राणायाम सुबह या दोपहर के समय किया जाए। किंतु जब समस्या सामने खड़ी हो—यानी रात में सोने एक पूर्व —उसी समय समाधान को लागू करना कहीं अधिक असरदार होता है, क्योंकि उस समय व्यक्ति की सहज बुद्धि (कॉमन सेंस) सबसे अधिक सक्रिय होती है। उस समय समस्या है और उसका सामना किया जा सकता है ।  जैसे किसी खतरे के सामने खड़े होने पर तुरंत लिया गया निर्णय सबसे प्रभावी होता है, वैसे ही रात में सोने के पूर्व किया गया अभ्यास सीधा असर दिखाती है।

तरीका इस प्रकार है:

  1. पेट (एब्डोमिन) को फुलाते हुए सांस भरें।
  2. सांस छोड़ते समय गले से आवाज़ के साथ सांस बाहर निकालें (जैसे उज्जायी प्राणायाम में की जाने वाली ध्वनि)।
  3. सांस छोड़ते समय उसी विशेष ध्वनि व स्वर के साथ सांस को गले से बाहर करें।

सामान्यतः इस अभ्यास की 11 मिनट का अभ्यास बताया जाता है । किंतु सिर्फ पेट की मांसपेशियों को बाहर निकालने और छोड़ने के साथ गले से आवाज़ उत्पन्न करने की यह तकनीक इतनी प्रभावी होती है कि 11 मिनट पूरे होने से पहले ही व्यक्ति गहरी नींद में पहुंच जाता है।

इसके लाभ 

  • मांसपेशियों की रिकवरी इतनी उच्च गुणवत्ता की होती है कि पांच से छह घंटे तक नींद नहीं टूटती।
  • इतने घंटों में शरीर, मन और आत्मा तीनों पूरी तरह संतुष्ट महसूस करते हैं।
  • सुबह उठते ही बॉवल मूवमेंट अच्छी तरह होता है, जिससे शरीर के विषाक्त पदार्थ (टॉक्सिंस) साफ होते हैं और धीरे-धीरे कब्ज़ (कॉन्स्टिपेशन) की समस्या भी ठीक होने लगती है। जब तक पेट की बेचैनी रात भर बनी रहती है, तब तक कब्ज़ पूरी तरह ठीक नहीं हो सकता—चाहे कितने भी चूर्ण या दवाइयां क्यों न ली जाएं।
  • लिवर, मसल्स और हृदय सहित शरीर के सभी प्रमुख अंगों की रिकवरी बेहतर होती है। जब शरीर पूरी तरह रिलैक्सेशन मोड में होता है, तो रात में हृदय गति (पल्स) भी नहीं बढ़ती—यह 50 के आसपास स्थिर रह सकती है।

यहाँ पर कुछ भ्रम भी हैं जिसे समझना बहुत आवश्यक है सामान्य लोग खर्राटों के कारण तुरंत आने वाली नींद को बहुत अच्छा मानते हैं । वे अनभिज्ञ हैं कि उनकी नींद के आने का मूल कारण मस्तिष्क का अत्यंत थकान है जो खर्राटे के कारण ही है । वह नींद अच्छी नहीं मानी जा सकती है ।  ऐसे लोग सुबह उठते ही बेचैनी की अवस्था में रहते हैं और उन्हें तुरंत चाय या शक्कर की मांग (क्रेविंग) होने लगती है। जबकि अगर व्यक्ति पूरी तरह शांत और गहन निद्रा से उठा है तो घंटों तक कुछ खाने का मन नहीं कर सकता है —बल्कि शरीर स्वाभाविक रूप से पहले खुद को हल्का (रिलीज़) करना चाहता है।

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